इतिहास की मोटी पुस्तकें, वो अनगिनत अध्याय
हर कालखण्ड का मानचित्र, वो अक्षर या रेखायें
पीले सफेद पन्नों पर, किसी स्याही से लिखी हैं
यदि सोचते हो ऐसा, ये तुम्हारा भ्रम है!
क्योंकि कागज पर वो स्याही, जो कहानी बताती है!
उससे पहले इस धरती पर, किसी के खून से लिखी जाती है!
क्योंकि नियती है यदि खून, तो खून तो बहेगा!
या तो ‘हम’ करें वार, या ‘शत्रु’ करेगा!
संग्राम यदि अहिंसा का था तो, जलियांवाला क्या था?
हिन्दी-चीनी भाई-भाई तो, 62 क्यों घटा था?
बसते गये लाहौर प्रेम से, तो कारगिल क्यों फटा था?
पर जब हमने किया था वार, तो शत्रु टुकड़ों में बंटा था।
रावण हो या दुर्योधन अस्तित्व तो, खून से ही मिटा था।
यदि सोचते हो अन्यथा, तो ये तुम्हारा भ्रम है!
मुझपे न हो यकीन, तो कोई चिकित्सक तुम्हें बतायेगा
छोटी मोटी फुंसी हो, तो ठंडा मलहम लगायेगा।
पर घाव यदि नासूर बना, तो फोड़े को चिरवायेगा
अंग अगर कोई सड़ जाये तो काट के उसे हटायेगा,
करना पड़े जो शल्य तो खून अवश्य बहेगा।
यदि सोचते हो अन्यथा, तो ये तुम्हारा भ्रम है!
है कोई प्रेम का मलहम, तो जाकर उन्हें लगा दो
हाफिज़, नकवी, अज्हर को तुम प्रेम से यहां बुलवालो
उन जानवरों में इन्सान अगर है तो उसको तुम जगा लो
वर्ना करने दा मुझे अपना काम तुम बैठो मजा लो
यदि सोचते हो अन्यथा, तो ये तुम्हारा भ्रम है!
मेरी बात की जो की उपेक्षा, तो कर लो फिर प्रतीक्षा
फिर होगा पुलवामा, मुम्बई, या जहॉ शत्रु की इच्छा
और बहता हुआ खून बस देगा यही शिक्षा
क्योंकि नियती है यदि खून, तो खून तो बहेगा!
या तो ‘हम’ करें वार, या ‘शत्रु’ करेगा!
Written by Lt. Col Manoj Kumar Sinha
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